The Festival of Light

Diwali Celebration

दीपावली पांच पर्वों का अनूठा त्योहार है. इसमें धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और यमद्वितीया आदि मनाए जाते हैं. घर के बड़े-बुजुर्ग घरों की साफ-सफाई करते हैं, घरों में सफेदी कराते हैं. घरों को सजाते हैं, नये साल का कलैंडर लगाते हैं. बच्चे घरों को सजाने में रुचि लेते हैं, साथ ही दीपावली के दिन से पहले ही पटाखे फोड़ना शुरू कर देते हैं. लोग आपस में मिठाइयां बांटते हैं. 
बाजार नये-नये सामानों से सज जाते हैं. बाजारों में रोनक तो देखते ही बनती है. लोग इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं. दीपावली की रात्रि को महानिशीथ के नाम से जाना जाता है. इस रात्रि में कई प्रकार के तंत्र-मंत्र से महालक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर पूरे साल के लिए सुख-समृद्धि और धन लाभ की कामना की जाती है.

diwali-celebration-sultanganj-bhagalpur-bihar

हम दीवाली क्‍यों मनाते है, आखिर इसके पीछे क्‍या कारण है, कुछ लोगों का कहना है दीपावली के दिन अयोध्या के राजा राम लंका के अत्याचारी राजा रावण का वध करके अयोध्या वापस लौटे थे, उनके अयोध्‍या आने की खुशी में दीपावली का त्‍योहार मनाया जाता है। दीपावली मनाने के पीछे अलग अलग राज्‍यों और धर्मो में अलग-अलग कारण व्‍याप्‍त हैं। धर्म कोई भी हो मगर इस दिन सभी के मन में उल्‍लास और प्रेम का दीप जलता है। हम सभी अपने घरो की साफ-सफाई करते हैं, घरों में कई पकवान बनते हैं। हम आपको बताते है 7 पौराणिक और ऐतिहासिक कुछ ऐसे रोचक तथ्यों के बारे में जिसकी वजह से न केवल हिंदू बल्कि पूरी दुनिया के लोग दीपावली के त्‍योहार को बड़े हर्ष और उल्‍लास के साथ मनाते हैं।

जानिए क्या है दीवाली की पौराणिक कहानी:


diwali-celebration-katha

प्राचीन दंतकथाओं के अनुसान बहुत पहले एक साहुकार था. उसकी बेटी प्रतिदिन पीपल पर जल चढ़ाने जाती थी. पीपल पर लक्ष्मीजी का वास था. एक दिन लक्ष्मीजी ने साहुकार की बेटी से कहा तुम मेरी सहेली बन जाओ. उसने लक्ष्मीजी से कहा मैं कल अपने पिता से पूछकर उत्तर दूंगी. पिता को जब बेटी ने बताया कि पीपल पर एक स्त्री मुझे अपनी सहेली बनाना चाहती हैं. पिताश्री ने हां कर दी. दूसरे दिन साहूकार की बेटी ने सहेली बनाना स्वीकार कर लिया.

एक दिन लक्ष्मीजी साहुकार की बेटी को अपने घर ले गई. लक्ष्मीजी दे उसे ओढ़ने के लिए शाल-दुशाला दिया तथा सोने की बनी चौकी पर बैठाया. सोने की थाली में उसे अनेक प्रकार के व्यंजन खाने को दिए. जब साहुकार की बेटी खा-पीकर अपने घर को लौटने लगी तो लक्ष्मीजी बोली “तुम मुझे अपने घर कब बुला रही हो”.

पहले सेठ की पुत्री ने आनाकानी की परन्तु फिर तैयार हो गई . घर जाकर वह रूठकर बैठ गई. सेठ बोला तुम लक्ष्मीजी को घर आने का निमंत्रण दे आयी हो और स्वयं उदास बैठी हो. तब उसकी बेटी बोली-“लक्ष्मीजी ने तो मुझे इतना दिया और बहुत सुन्दर भोजन कराया. मैं उन्हें किस प्रकार खिलाऊंगी, हमारे घर में तो उसकी अपेक्षा कुछ भी नहीं हैं.” तब सेठ ने कहा जो अपने से बनेगा वही खातिर कर देंगे. तू फौरन गोबर मिट्टी से चौका लगाकर सफाई कर दे. चौमुखा दीपक बनाकर लक्ष्मीजी का नाम लेकर बैठ जा. उसी समय एक चील किसी रानी का नौलखा हार उसके पास डाल गई. साहूकार की बेटी ने उस हार को बेचकर सोने की चौकी, सोने का थाल, शाल-दुशाला और अनेक प्रकार के भोजन की तैयारी कर ली.थोड़ी देर बाद गणेशजी और लक्ष्मीजी उसके घर पर आ गये. साहूकार की बेटी ने बैठने के लिए सोने की चौकी दी. लक्ष्मी ने बैठने को बहुत मना किया और कहा कि इस पर तो राजा रानी बैठते हैं. तब सेठ की बेटी ने लक्ष्मीजी को जबरदस्ती चौकी पर बैठा दिया. लक्ष्मीजी की उसने बहुत खातिर की इससे लक्ष्मीजी बहुत प्रसन्न हुई और साहूकार बहुत अमीर बन गया. हे लक्ष्मी देवी! जैसे तुमने साहूकार की बेटी की चौकी स्वीकार की और बहुत सा धन दिया वैसे ही सबको देना.

दीवाली मनाने के 6 रोचक तथ्‍य:


reason-of-diwali-celebration
  1. भगवान राम की विजय-
  2. हिंदू धर्म में मान्‍यता है कि दीपावली के दिन आयोध्‍या के राजा श्री राम ने लंका के अत्‍याचारी राजा रावण का वध किया था, वध करने के बाद वे अयोध्‍या वापस लौटे थे। उनके अयोध्‍या लौटने की खुशी में वहां के निवासियों ने दीप जलाकर उनका स्‍वागत किया था और खुशी मनाई थी। उसी दिन से दीपावली का त्‍यौहार मनाया जाने लगा ।

  3. श्री कृष्ण ने किया था नरकासुर का वध-
  4. दीवाली के एक दिन पहले राक्षस नरकासुर ने 16,000 औरतों का अपहरण कर लिया था तब भगवान श्री कृष्ण ने असुर राजा का वध करके सभी औरतों का मुक्‍त किया था, कृष्ण भक्तिधारा के लोग इसी दिन को दीपावली के रूप में मनाते हैं।

  5. विष्णु जी का नरसिंह रुप-
  6. दीवाली के एक दिन पहले राक्षस नरकासुर एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विंष्णु ने नरसिंह रुप धारण कर हिरण्यकश्यप का वध किया था इसी दिन समुद्रमंथन के दौरान लक्ष्मी व धन्वंतरि प्रकट हुए थीं।

  7. सिक्‍खों के लिए है खास दिन-
  8. इस दिन सभी सिक्‍ख अपने तीसरे गुरू अमर दास जी का आर्शिवाइ लेने के लिए इक्‍ट्ठा होते हैं। 1577 में इसी दिन स्वर्ण मन्दिर का शिलान्यास हुआ था, और इसके अलावा 1619 में कार्तिक अमावस्या के दिन सिक्खों के छठे गुरु हरगोबिन्द सिंह जी को जेल से रिहा किया गया था।

  9. जैनियो के लिए खास दिन-
  10. जैन धर्म में दीपावली के दिन का काफी बड़ा महत्‍व है, इस दिन आधुनिक जैन धर्म की स्‍थापना के रूप में मनाश्‍स जाता है इसके अलावा दीवाली के दिन जैनियो को निर्वाण भी प्राप्त हुआ था।

  11. आर्य समाज की स्‍थापना के रूप में-
  12. इस दिन आर्य समाज के संस्‍थापक महर्षि दयानन्द ने भारतीय संस्कृति के महान जननायक बनकर दीपावली के दिन अजमेर के निकट अवसान लिया था। इसके अलावा मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में दौलतखाने के सामने 40 गज ऊँचे बाँस पर एक बड़ा दीप जलाकर लटकाया जाता है। वहीं शाह आलम द्वितीय के समय में पूरे शाही महल को दीपों से सजाया जाता था इस मौके पर हिन्दू और मुसलमान दोनों मिलकर पूरे हर्ष और उल्‍लास के साथ त्‍योहार मनाते थे। इतिहास के पन्‍नों में दर्ज आकड़ों के अनुसार 500 ईसा वर्ष पूर्व मोहनजोदड़ो सभ्यता में खुदाई के दौरन मिट्टी की एक मूर्ति में देवी के दोनों हाथों में दीप जलते दिखाई देते हैं। जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस समय भी दीपावली का त्‍यौहार मनाया जाता था।

Note : Some contents on this blog is taken from various website(s), books and based on personal experience for the purpose of spreading knowledge and to help people finding solutions they are looking for. We do not allow readers to violate any copyright law like to sell or distribute for business purpose. They are allowed to Read, Share and Print the document. However we are giving credit to websites from where some of content is used by us. You can find list of websites in the link : Source Credit

Milan Anshuman is a travel blogger with proficiency in nature and wildlife photography. Apart from this he loves to write article for technology, food, health & lifestyle, education, ayurveda and yoga.

Want to list your Business?

Send us your Business Details